मनोरंजन

भारत से बच्चे लापता और एप्सटिन फ़ाइल्स में भिखारी राजा का नाम
भारत में बच्चों के लापता होने की समस्या धीरे-धीरे एक गंभीर राष्ट्रीय संकट का रूप लेती जा रही है। यह केवल कानून-व्यवस्था...

चाय वाला का नाम एपस्टीन फाइल में आ गया
गरीब का बेटा न्यूज हैंड/विष्णु नागरफँस गया बेचारा, गरीब का बेटा, चारों तरफ से, बल्कि ऊपर और नीचे से भी! जब भी संकट...

Sanchar Saathi-भारत की जनता की प्राइवेसी अब प्राइवेसी नहीं रही नरेंद्र मोदी संचार साथी सब जानता है
संचार साथी : साइबर सुरक्षा या साइबर निगरानी?आलेख : प्रबीर पुरकायस्थमोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं, प्राइवेसी समूहों और मोबाइल...

Marriage -ऐसा कारवाँ, जो सड़क पर उतरते ही यह ऐलान कर देता है कि शहर की हर गली अब उसकी जागीर है
खुशी की कीमत क्या दूसरों की परेशानी हो सकती है? बारातें चलती हैं, संवेदनशीलता ढह जाती है उल्लास या उत्पीड़न: खोती...

आरएसएस का सैक्स रकेट
आरएसएस : देशभक्ति के नाम पर गुदा मर्दनकेरल के कोट्टयम में रहने वाले आनंदु अजी (Anandu, Aji)की रीयल लाइफ स्टोरी अब...

लाखों “फॉलोअर्स” फिर भी खोखलापन भावनाएँ “पोस्ट” बनकर रह गई हैं, और संवेदनाएँ “स्टोरी”
भविष्य की सबसे बड़ी ज़रूरत: फिर से इंसान बनना विकास की ऊँचाइयों पर इंसानियत की गिरावट इंसानियत का अपहरण: अपराधी हम...

अयोध्या में विवादित भूमि पर आए अदालती फ़ैसले के बाद भारत में बहुत कुछ बदल गया
आखिरकार पूर्व न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने हिंदुत्व के प्रति अपनी निष्ठा साबित कर दी…!आलेख : हर्ष मंदर, अनुवाद : ज़फ़र...

डोनाल्ड ट्रंप साहब के साथ वाकई बुरा हुआ
राजनैतिक व्यंग्य-समागम1. शांति का नोबेल : गुरु गुड़ रह गए, चेली शक्कर होए! -- राजेंद्र शर्मा गुरु गुड़ का गुड़ रहा, चेली...

रिश्ते अब इंस्टेंट नूडल्स क्यों बन गए हैं?
रिश्तों की माइक्रोवेव पीढ़ी: त्वरित गर्माहट, त्वरित ठंडापन स्वाइप के रिश्ते: जितनी जल्दी जुड़ते, उतनी जल्दी टूटते ...

गर्भनिरोधक: केवल उपाय नहीं, सशक्त जीवन की कुंजी
रूढ़ियों को तोड़कर जिम्मेदारी की ओर—विश्व गर्भनिरोधक दिवस विश्व गर्भनिरोधक दिवस(World Contraception Day)...

हिंसक गेमिंग और पोर्न पर भी रोक जरूरी
सुरक्षित समाज की राह : गेमिंग बिल संग पोर्न पर सख्ती युवा शक्ति की रक्षा : हिंसक गेमिंग और पोर्न पर भी रोक जरूरी ...

आस्था बनाम इंस्टाग्राम: किस ओर जा रही है हमारी पहचान?
रीतियाँ रह गईं पीछे, रील्स हो गईं आगे आस्था बनाम इंस्टाग्राम: किस ओर जा रही है हमारी पहचान? भक्ति से ब्रांडिंग तक:...











