हामी अर्थ आर्ट फेस्टिवल' मुंबई में पद्मश्री डॉ. सोमा घोष की सुरमयी प्रस्तुति
मुंबई /न्यूज हैंड ब्यूरो
मुंबई के ऐतिहासिक फोर्ट स्थित नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) में हाल ही में तीन दिवसीय 'हामी अर्थ आर्ट फेस्टिवल' का अत्यंत गरिमामय और शानदार समापन हुआ। इस महोत्सव का उद्घाटन विज्ञापन जगत के दिग्गज प्रहलाद कक्कड़, फिल्म निर्देशक तुषार हिरानंदानी, डॉ. मेघा फणसळकर, और पार्श्व गायक हृषिकेश जे. चुरी जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों द्वारा किया गया। संस्थापक हृषिकेश जे. चुरी के मार्गदर्शन में आयोजित इस उत्सव का मुख्य आधार 'क्लीन आर्ट' अभियान रहा, जिसका उद्देश्य कला जगत में व्यावसायिक नैतिकता को बढ़ावा देना और कलाकारों के लिए एक स्वस्थ एवं पारदर्शी वातावरण सुनिश्चित करना है।
इस आयोजन में 1,000 से अधिक कलाकारों और 60 से अधिक गणमान्य हस्तियों ने हिस्सा लिया, जिनमें पद्मश्री पुरस्कार विजेता गायक, संगीतकार, पार्श्व गायक, अभिनेता, फिल्म निर्माता, निर्देशक और प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार एवं नर्तक शामिल थे। इस अवसर पर विभिन्न देशों के महावाणिज्य दूतों (Consulate Generals), कुलपतियों, ब्रह्मकुमारियों और प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस महोत्सव में भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुप्रसिद्ध साधिका पद्मश्री डॉ. सोमा घोष की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने न केवल अपनी गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि भारतीय कला के भविष्य को लेकर एक नई दृष्टि भी साझा की। महोत्सव के दौरान एक विशेष पैनलिस्ट के रूप में डॉ. सोमा घोष ने 'शास्त्रीय संगीत के विकास' और 'अगली पीढ़ी को गढ़ने में गुरु-शिष्य परंपरा की भूमिका' पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें हमारी प्राचीन परंपराओं में निहित हैं और युवा पीढ़ी को इनसे जोड़ना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. सोमा घोष ने आयोजकों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, "इस सुंदर उत्सव का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करने हेतु मैं हृषिकेश जे. चुरी जी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ।" उन्होंने हृषिकेश चुरी के 'क्लीन आर्ट' अभियान की सराहना करते हुए इसे कलाकारों के लिए एक स्वस्थ और नैतिक वातावरण बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। हृषिकेश जे. चुरी ने डॉ. सोमा घोष के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जैसे दिग्गज कलाकारों के सहयोग से ही भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने का स्वप्न साकार हो रहा है।